Walk for health any time any where        Exercise daily for 45 minutes        Health is not automatic… work for it        Say no to excessive sugar, salt and fried food        Know your disease… .know your rights Manage stress before stress manages you        Follow doctors’ advice

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संक्षिप्त इतिहास

भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वास्थ शिक्षा की आवश्यकता और प्रचलन की पहचान प्राचीन है। भारत में औपचारिक तौर पर स्वास्थ्य शिक्षा को सन् 1929 में देखा जा सकता है, जब मैसूर राज्य (अब – कर्नाटक ) में जनसाधारण को बेहतर स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जानकारी देने के लिए राज्य के स्वास्थ्य सेवा निदेशालय में प्रचार इकाई स्थापित की गयी थी। सन् 1940 तक देश के लगभग सभी राज्यों में प्रचार इकाइयों को स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के अंग के रूप में स्थापित किया जा चुका था। यद्यपि सन् 1944 में, सर जोसफ भोर की अध्यक्षता में स्वास्थ्य सर्वेक्षण समिति को यह एहसास हुआ कि इस उद्देश्य हेतु राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत और गहन स्वास्थ्य शिक्षा के साथ साथ स्वतंत्र संगठनों की आवश्यकता है। समिति ने ज़ोर देकर केंद्र और राज्य स्तरों पर स्वास्थ्य शिक्षा को एकीकृत करने की सिफारिश की।
 

प्रथम पंच वर्षीय योजना की अवधि के दौरान, योजना आयोग ने देश में गहन स्वास्थ्य शिक्षा संबंधी गतिविधियों की आवश्यकता को बार बार दोहराया । आयोग ने कहा कि “सार्वजनिक स्वास्थ्य की संपूर्ण प्रगति लोगों की स्वैच्छिक सहमति और सहयोग तथा व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वास्थ्य रक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदमों में उनके सक्रिय रूप से भाग लेने पर निर्भर करती है । यह मानते हुए कि कितने रोग सरल स्वच्छता के नियमों की अनदेखी या उनको व्यवहार में ना लाने के परिणाम स्वरूप होते हैं, उठाया गया कोई भी कदम स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान किए जाने की तुलना से बेहतर नहीं होगा”। इस विचार के साथ योजना आयोग ने केंद्र और राज्य स्तरों पर कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या और उपकरणों से लैस स्वास्थ्य शिक्षा बयूरो स्थापित करने की सिफारिश की। प्रारम्भिक तौर पर केंद्रीय स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो ने अपनी गतिविधियों और कार्यों के बारे में राज्य स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो (एसएचईबी) को दिशा निर्देश प्रदान किए और साथ ही सभी राज्यों में स्वास्थ्य शिक्षा सेवाओं को सशक्त करने के लिए पूंजी भी प्रदान की । बाद में एसएचईबी स्वास्थ्य सेवा निदेशालय का अंग बन गया और कुछ एसएचईबी आईईसी ब्यूरो में परिवर्तित कर दिये गए।